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स्थानीय श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेशित विधार्थियों के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम आयोजित किया गया

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आई पी मिश्रा ने बड़ी संख्या में आए विधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में शिक्षा में कौशल विकास,नवाचार और तकनीकी ज्ञान तो शामिल है ही पर इसमें संस्कार और हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश आवश्यक है

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दुर्ग /भिलाई/आराध्या टाइम डेस्क विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आई पी मिश्रा ने बड़ी संख्या में आए विधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में शिक्षा में कौशल विकास,नवाचार और तकनीकी ज्ञान तो शामिल है ही पर इसमें संस्कार और हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश आवश्यक है। उन्होंने संस्था की स्थापना से अभी तक के विकास की चर्चा की और बताया शंकराचार्य समूह की संस्थाओं के विद्यार्थी विदेश में भी अपनी प्रतिभा का झंडा फहरा रहे हैं। अच्छे शिक्षक और अच्छे विद्यार्थी ही संस्था की नींव होते है।कड़ी मेहनत और लगन से ही मंजिल मिलती हैं।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के साथ प्रोफेशनल शब्द जुड़ा है जो बहुत कम मिलेगा,उनका उद्देश्य है कि हमारा विद्यार्थी रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि देने वाला बने। संस्कृत के श्लोकों का सारगर्भित उदाहरण देते हुए उन्होंने विधार्थियों को प्रेरित किया कि मोबाइल का सदुपयोग हो और पढ़ाई में ध्यान केंद्रित हो तभी आप सफल हो सकते है और इसमें इस संस्था का पूरा सहयोग ,मार्गदर्शन मिलेगा।
शिक्षण समिति की प्रेसिडेंट डॉ जया मिश्रा ने भी अपने संबोधन में विधार्थियों को नई नीति और तकनीक से अपडेट रहने की जरूरत बतलाई।उन्होंने संस्था के लगातार प्रयासों को छात्र हित में बताते हुए उपलब्ध नई जानकारी का सदुपयोग करने को कहा।
कुलपति डॉ ए के झा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें विधार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रयास किए गए है।अंतर विषयक ज्ञान परंपरा को लेकर कई प्रावधान किए गए है।कौशल विकास,इंटर्नशिप की भी व्यवस्था का समावेश किया गया है


प्रारंभ में कुलसचिव डॉ स्मिता सिलेट ने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और नई योजनाओं की विस्तृत चर्चा की।कुलसचिव ने बताया कि बड़ी संख्या में विधार्थियों के प्रवेश ने यह साबित कर दिया
कि पढ़ाई और रोजगार मार्गदर्शन और अवसर की उपलब्धता में हम अग्रणी हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ सिंधु नायर और डॉ परख सहगल ने किया।इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।अंत में विश्वविद्यालय के डायरेक्टर विकास डॉ सुशील चंद्र तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

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