

दुर्ग भिलाई /
आराध्या टाइम्स डेस्क /कार्यक्रम की शुरुआत माननीय मुख्य अतिथि श्रीमान राजेश चौहान और अन्य विशिष्ट अतिथियों के स्वागत से हुई। एसआरजीआई के अध्यक्ष श्री संजय रूंगटा, एसआरजीआई के निदेशक डॉ. साकेत रूंगटा, एसआरजीआई के निर्देशक डॉ. जवाहर सुरी सेठी और सीबीएसई कलस्टर (खेल पर्यवेक्षक) श्री आशीष चौधरी, प्राचार्य श्री राजीव कुमार, उपप्राचार्या दीप्ति सिंग ने ज्ञान, एकता और खेल कौशल का प्रतीक माता सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया।विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीमान राजीव कुमार ने सभी अतिधिगण सहित प्रतिभागी स्कूलों को संबोधित करते हुए कहा कि “खेलो को हमेशा खिलाड़ी भावना से खेला जाना चाहिए। यह अनुशासन और टीम भावना को भी प्रोत्साहित करता है।” इस अवसर की महता को चिन्हित करने के लिए क्षेत्र की समृद्ध सास्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए एक जीवंत सास्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। छात्रों द्वारा छत्तीसगढी सामूहिक गीत प्रस्तुत किया गया, जिसने माहौल को और भी सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। रंगारंग नृत्य प्रस्तुतियाँ ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।सीबीएसई कलस्टर का आधिकारिक ध्वजारोहण मुख्य अतिथि श्रीमान राजेश चौहान एवं श्रीमान आशीष चौधरी खेल पर्यवेक्षक (सीबीएसई कलस्टर) द्वारा किया गया। इस प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों में आए लगभग 50 स्कूलों के लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया ।अपने-अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हुए अनुशासित मार्च पास्ट में भाग लिया। रूंगटा पब्लिक स्कूल के हेड बॉय जयांश मेहता एवं हेड गर्ल रुविनी पॉल (कक्षा 12वीं) के द्वारा सभी प्रतिभागियों को सच्ची खेल भावना को बनाए रखने की शपथ दिलवाई गई। तत्पश्चात मुख्य अतिथि महोदय ने टूर्नामेंट के उद्घाटन की घोषणा की

एसआरजीआई के अध्यक्ष श्री संजय रूंगटा ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा, “खेल हो या जीवन, अर्जुन की तरह हमे सदैव अपने लक्ष्य पर कंद्रित रहना चाहिए। तभी हम सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने युवा खिलाड़ियों की उत्कृष्टता के लिए कई प्रयास करने की घोषणा भी की।मुख्य अतिथि श्री राजेश चौहान ने खेलों के समग्र विकास के महत्व पर जोर दिया और प्रतिभागियों को उनके प्रयासों में सफलता की कामना करते हुए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आप में से एक भी अगर ऑलम्पिक खेलों में जाता है तो यह हम सब के लिए अत्यंत गर्व का विषय होगा। मुख्य अतिथि श्रीमान राजेश चौहान को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।



