माता धूमावती का रूप अत्यंत भयंकर हैं, माता धूमावती का यह स्वरूप विधवा का है। केश बिखरे हुए हैं, माता धूमावती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और इनके केश खुले रहते हैं पं. दीपक शर्मा अवधेश्वर बाबाधाम मंदिर
इनके रथ के ध्वज पर कौए का चिह्न है, इन्होंने हाथ में सूप धारण किया हुआ है, कौआ माता धूमावती का वाहन है। इनका स्वरूप अत्यंत उग्र होने के बाद भी संतान के लिए कल्याणकारी होता है। मां धूमावती का संबंध केतु ग्रह तथा इनका नक्षत्र ज्येष्ठा है, इस कारण इन्हें ज्येष्ठा भी कहा जाता है


दुर्ग/भिलाई
आराध्या टाइम्स डेस्क/माता धूमावती का रूप अत्यंत भयंकर हैं, माता धूमावती का यह स्वरूप विधवा का है। केश बिखरे हुए हैं, माता धूमावती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और इनके केश खुले रहते हैं। इनके रथ के ध्वज पर कौए का चिह्न है, इन्होंने हाथ में सूप धारण किया हुआ है, कौआ माता धूमावती का वाहन है। इनका स्वरूप अत्यंत उग्र होने के बाद भी संतान के लिए कल्याणकारी होता है। मां धूमावती का संबंध केतु ग्रह तथा इनका नक्षत्र ज्येष्ठा है, इस कारण इन्हें ज्येष्ठा भी कहा जाता है।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को धूमावती जयंती मनाई जाती है। देवी मां पीताबरा शक्तिपीठ के प्रांगण में बना मां भगवती धूमावती देवी मन्दिर देश-दुनिया में एकलौता माना जाता है। मन्दिर परिसर में मां धूमावती की स्थापना करने के लिए अनेक विद्वानों ने स्वामीजी महाराज को मना किया था। तब स्वामी जी ने कहा था – “मां का भयंकर रूप तो दुष्टों के लिए है, भक्तों के प्रति ये अति दयालु हैं।”
पं. दीपक शर्मा अवधेश्वर बाबाधाम मंदि चौहान ग्रीन वैली जुनवानी भिलाई -9752348510




