सिहोर के आष्टा में किसी ने गुलाल के साथ फेंका नारियल सर पकड़े दिखे कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा सीहोर जिले के आष्टा का बताया जा रहा है मामला जहां प्रदीप मिश्रा 29 मार्च को महादेव होली उत्सव में शामिल हुए थे
पंडित प्रदीप मिश्रा के सिर में नारियल लगने से ब्रेन में सूजन की बात डॉक्टर द्वारा बताई गई


सिहोर/अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने सिर में नारियल लगने से ब्रेन में सूजन की बात बताई घटना सीहोर जिले के आष्टा का बताया जा रहा है जहां पंडित प्रदीप मिश्रा 29 मार्च को महादेव होली उत्सव में शामिल हुए थे वह लोगों पर रंग गुलाल उड़ाते आगे बढ़ रहे हैं वही लोग भी उन पर फूल और रंग गुलाल फेंक रहे इसी दौरान एक नारियल जाकर उनके सिर पर लगता है जिसके बाद पंडित प्रदीप मिश्रा सर पकड़ कर बैठ जाते हैं रथ पर सवार उनके शिष्य ने नारियल उठाया और इधर-उधर देखकर यह जानने का प्रयास किया कि नारियल किसने फेंका रथ पर सवार बाकी लोग कथावाचक प्रदीप मिश्रा के पास पहुंचते हैं और उनके सर को देखते हैं पंडित प्रदीप मिश्रा ने 1 अप्रैल सोमवार को नीमच के मानसा में कथा के मंच से खुद इस घटना का जिक्र किया था और स्वास्थ् का हवाला देकर कथा को निरस्त कर दिया था उन्होंने कहा था 29 मार्च को आष्टा में महादेव होली खेली गई थी इस दौरान गुलाल की जगह कोई नारियल फेंका गया इसके कारण ब्रेन में थोड़ी दिक्कत आ गई है अंदर की तरफ चोट लगने के कारण ब्रेन में सूजन हो गया है डॉक्टर ने कहा है कि दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं देना है जब तक डॉक्टर परमिशन नहीं देते पंडित प्रदीप मिश्रा कथा नहीं कर सकते श्री विट्ठलेश सेवा समिति के समीर शुक्ला ने घटना के बारे में बताया कि उन्होंने कहा पंडित जी 29 मार्च को आष्टा में महादेव की होली कार्यक्रम में शामिल हुए थे वह खुली जीप में सवार होकर भक्तों के साथ यात्रा में आगे बढ़ रहे थे जमकर रंग गुलाल उड़ रहा था इसी दौरान गुलाल के साथ अचानक से एक नारियल आ गया जो पंडित जी के सिर पर लगा कुछ देर बाद पंडित जी को चक्कर सा आने लगा पंडित जी के फैमिली डॉक्टर से बात की गई तब वह उज्जैन में थे उनके कहने पर पंडित जी उज्जैन पहुंचे यहां पर जांच में पता चला कि ब्रेन के भीतरी हिस्से में सूजन है इस कारण से चक्कर आ रहे हैं सभी जांच के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा जी तीन दिन डॉक्टर की निगरानी में रहे नीमच के मानसा में सोमवार से कथा होनी थी ऐसे में पंडित जी डॉक्टर से अनुमति लेकर उज्जैन से नीमच पहुंचे और भक्तों को कथा निरस्त करने का कारण बताया




