वट सावित्री व्रत हर जगह मनाया जा रहा है जिससे मंदिर देवालयों में अधिकतर महिलाएं पूजा करती नजर आ रही है
ज्येष्ठा अमावस्या पर शनि जयंती भी मनाई जाती है, वैदिक ज्योतिष में शनि देव सेवा और कर्म के कारक हैं अतः इस दिन उनकी कृपा पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।


दुर्ग /रायपुर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वट सावित्री व्रत हर जगह मनाया जा रहा है जिससे मंदिर देवालयों में अधिकतर महिलाएं पूजा करती नजर आ रही ह


हर वर्ष वट सावित्री व्रत सावित्री व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन किया जाता है इसी दिन पतिव्रता देवी सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी वट सावित्री के दिन पति की लंबी आयु की कामना के लिए सुहागन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर वट यानी बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री सत्यवान व अन्य इष्ट देवों का पूजा करती है वट सावित्री का व्रत समस्त परिवार की सुख संपन्नता के लिए भी किया जाता है देवी सावित्री ने यमराज से ना केवल अपने पति के प्राण वापस पाए थे बल्कि उन्होंने समस्त परिवार के कल्याण का वर भी प्राप्त किया था भारतीय संस्कृति में यह व्रत आदर्श नारीत्व का प्रतीक है 
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन नदी जलाशय या कुंड आदि में स्नान करने और सूर्य देव को अर्घ्य देकर बहते जल में तिल प्रवाहित करने का विधान है। ज्येष्ठा अमावस्या पर शनि जयंती भी मनाई जाती है, वैदिक ज्योतिष में शनि देव सेवा और कर्म के कारक हैं, अतः इस दिन उनकी कृपा पाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती हैÍ ज्येष्ठ अमावस्या पर दान, धर्म, पिंडदान के साथ-साथ शनि देव का पूजन और वट सावित्री व्रत भी रखा जाता है।





