

दुर्ग/आराध्या टाइम डेस्क / लोककला दर्पण मंच के तत्वावधान में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय जेल दुर्ग में महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 90वीं पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य साहित्य और कविता के माध्यम से जेल में निरुद्ध बंदियों में सकारात्मक सोच, मानवीय मूल्यों तथा सामाजिक चेतना का विकास करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करना था

कार्यक्रम में दुर्ग-भिलाई के प्रतिष्ठित कवियों, शायरों एवं कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं, ग़ज़लों, हास्य-व्यंग्य और प्रेरणादायी कविताओं से उपस्थित बंदियों एवं पुलिसकर्मियों का मन मोह लिया। प्रत्येक प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट से जेल परिसर गूँज उठा। कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि बंदियों को भी अपनी भावनाएँ और जीवन के अनुभव कविता के माध्यम से व्यक्त करने का अवसर मिला। बंदी भगतराम एवं हरिश्चंद्र ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के अनुभव साझा किए और अपने साथी बंदियों को सकारात्मक संदेश दिया

काव्य गोष्ठी में शहर के प्रसिद्ध शायर नवेद रज़ा दुर्गवी ने प्रभावशाली मंच संचालन करते हुए देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, आपसी सद्भाव और मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत ग़ज़लें प्रस्तुत कीं। उनकी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को प्रभावित किया। हाजी रियाज़ खाँ गौहर ने देशभक्ति से ओतप्रोत शायरी प्रस्तुत कर राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत की।ग़ज़लकार सुशील कुमार यादव ने जीवन के संघर्ष, समय की परिस्थितियों और मानवीय संबंधों पर आधारित रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। डॉ. नौशाद सिद्दीकी ने नशामुक्ति का संदेश देते हुए नशे से दूर रहने तथा जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा दी।
कवयित्री श्रीमती सीमा अष्टमी साहू ने माँ के त्याग, प्रेम और ममता पर आधारित भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की। वहीं, भिलाई की पार्षद एवं कवयित्री श्रीमती नोमिन साहू ने महिलाओं को जागरूक होने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज में अग्रणी भूमिका निभाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में महिला जेल की प्रभारी सहायक जेल अधीक्षक श्रीमती रश्मि चौधरी एवं विधि अधिकारी श्री ईशु देशमुख की विशेष उपस्थिति रही। महिला बंदियों ने भी गीत, कविता, भजन-कीर्तन और नृत्य के माध्यम से उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। इससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक और उल्लासपूर्ण वातावरण निर्मित हुआ।
इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि शायर नवेद रज़ा दुर्गवी एवं कवयित्री श्रीमती सीमा अष्टमी साहू के नेतृत्व में बंदियों के बीच साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का यह एक सराहनीय प्रयास रहा। बंदियों ने कार्यक्रम की प्रस्तुतियों की प्रशंसा की और इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस पहल से यह संदेश मिला कि साहित्य और कला के माध्यम से बंदियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित किया जा सकता है तथा उनके भीतर सकारात्मक परिवर्तन की भावना जागृत की जा सकती है

आयोजन के सूत्रधार कैलाश जैन बरमेचा, मनमोहन शर्मा एवं गौसेवा के अध्यक्ष श्री विजय अग्रवाल ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखने की इच्छा व्यक्त की।शायर नवेद रज़ा दुर्गवी, कवयित्री श्रीमती सीमा अष्टमी साहू एवं लोककला दर्पण मंच की ओर से यह संकल्प व्यक्त किया गया कि बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने तथा उनमें सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों का विकास करने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।यह काव्य गोष्ठी इस संदेश के साथ संपन्न हुई कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के विचारों में सकारात्मक परिवर्तन लाने, संवेदनाओं को जागृत करने और समाज को नई दिशा प्रदान करने की सशक्त शक्ति है।



